Excel या Word के बिल में GST की गलतियां तभी पकड़ में आती हैं जब रिटर्न फेल होता है। यह गाइड बताती
ऑनलाइन GST बिल का मतलब है ऐसा बिल जो प्रोडक्ट मास्टर और कस्टमर मास्टर से बनता है, इसलिए HSN, रेट और टैक्स का बंटवारा हर बार अपने आप सही आता है।
सेटअप में तीन चीजें एक बार तय होती हैं: बिज़नेस प्रोफाइल (GSTIN, राज्य), नंबरिंग सीरीज़ (16 कैरेक्टर तक, साल में यूनिक) और आइटम मास्टर (HSN/SAC, 5/18/40 रेट)।
B2B और B2C बिल में फर्क कस्टमर के GSTIN और प्लेस ऑफ सप्लाई से तय होता है; 50,000 रुपये या ज्यादा के B2C बिल पर कस्टमर का पता जरूरी है।
एक ही सिस्टम से कोटेशन, प्रोफॉर्मा, टैक्स इनवॉइस, क्रेडिट नोट और डिलीवरी चालान बनें तो GSTR-1 की Table 12 और Table 13 खुद तैयार हो जाती हैं।
आपका GSTIN, रजिस्टर्ड पता और राज्य, बैंक डिटेल, प्रोडक्ट या सर्विस की सूची HSN/SAC और GST रेट के साथ, और कस्टमर की जानकारी, जिसमें रजिस्टर्ड कस्टमर का GSTIN शामिल है।
The full guide has the formats, the deadlines and the worked examples.