मोबाइल से GST बिल कैसे बनाएं (फ्री, 2 मिनट में)
दुकान, डिलीवरी या क्लाइंट की साइट पर हों, GST बिल फोन से ही बन सकता है। यह गाइड बताती है कि मोबाइल ब्राउज़र में फ्री बिलिंग ऐप से Rule 46 के सभी फील्ड वाला बिल कैसे बनाएं और WhatsApp पर भेजें।

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Key takeaways
- मोबाइल ब्राउज़र में चलने वाला फ्री GST बिलिंग ऐप बिना ऐप स्टोर डाउनलोड के काम करता है, और एक बार प्रोफाइल सेट होने के बाद हर बिल दो मिनट में बनता है।
- GST बिल में Rule 46 के फील्ड जरूरी हैं: आपका GSTIN, 16 कैरेक्टर तक का यूनिक इनवॉइस नंबर, HSN/SAC, टैक्सेबल वैल्यू और CGST/SGST या IGST का अलग-अलग अमाउंट।
- 22 सितंबर 2025 से GST 2.0 के स्लैब 5, 18 और 40 प्रतिशत हैं, इसलिए प्रोडक्ट मास्टर में रेट अपडेट होना चाहिए, वरना बिल गलत बनेगा।
- फोन से बना हर बिल उसी डेटा से GSTR-1 में जाता है, इसलिए बिल बनाते समय कस्टमर का GSTIN और प्लेस ऑफ सप्लाई सही डालना रिटर्न की आधी तैयारी है।
मोबाइल से GST बिल बनाना अब कोई समझौता नहीं है। दुकान के काउंटर पर, डिलीवरी के समय या क्लाइंट के ऑफिस में बैठकर फोन से बना बिल उतना ही वैध है जितना लैपटॉप से बना, बशर्ते उसमें Rule 46 के सभी फील्ड हों और नंबरिंग सही हो। कानून डिवाइस नहीं देखता, डॉक्यूमेंट देखता है।
फर्क सिर्फ इतना है कि फोन की छोटी स्क्रीन पर गलती करना आसान है: कस्टमर का GSTIN गलत टाइप हो जाना, HSN छूट जाना, या इंटर-स्टेट सप्लाई पर IGST की जगह CGST/SGST लग जाना। इस गाइड में हम बताते हैं कि फ्री वेब बिलिंग ऐप में एक बार सेटअप करके ये गलतियां कैसे खत्म होती हैं, और उसके बाद हर बिल दो मिनट में कैसे बनता है।
अगर आप अभी GST रजिस्ट्रेशन की तैयारी में हैं तो पहले नए बिज़नेस के लिए GST चेकलिस्ट देख लें। बिल बनाने के लिए GSTIN जरूरी है।
मोबाइल से GST बिल बनाने के लिए क्या चाहिए
बिल बनाने से पहले पांच चीजें हाथ में रखें। ये एक बार ऐप में सेव हो जाती हैं, फिर हर बिल पर अपने आप आती हैं।
- आपका GSTIN, बिज़नेस का नाम और रजिस्टर्ड पता, जैसा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर है
- बैंक अकाउंट की डिटेल, जो बिल के नीचे पेमेंट के लिए छपती है
- लोगो की इमेज, फोन की गैलरी से ही अपलोड हो जाती है
- प्रोडक्ट या सर्विस की लिस्ट, हर आइटम का HSN या SAC कोड और GST रेट
- इनवॉइस नंबर का प्रीफिक्स, जैसे INV/26-27/, और शुरुआती नंबर
ऐप के लिए फोन में कोई डाउनलोड जरूरी नहीं। वेब आधारित बिलिंग ऐप Chrome या Safari में खुलता है, और ब्राउज़र के मेन्यू से "Add to Home Screen" करने पर ऐप की तरह आइकन बन जाता है। डेटा क्लाउड में रहता है, इसलिए फोन बदलने या खो जाने पर बिल सुरक्षित रहते हैं।

फ्री प्लान की सीमा जान लें
myBillPlease का फ्री प्लान एक यूज़र के लिए महीने में 100 इनवॉइस देता है, बिना कार्ड के। छोटी दुकान या फ्रीलांसर के लिए यह आमतौर पर काफी है। इससे ज्यादा बिल बनते हैं तो पेड प्लान की जरूरत पड़ेगी, यह पहले से तय रखें।
GST बिल में कौन से फील्ड जरूरी हैं
Rule 46 टैक्स इनवॉइस के फील्ड तय करता है। मोबाइल पर बिल बनाते समय इन्हें याद रखना जरूरी नहीं है, क्योंकि ऐप का फॉर्म इन्हीं फील्ड से बना होता है, लेकिन यह जानना जरूरी है कि कौन सा फील्ड क्यों है।
- सप्लायर का नाम, पता और GSTIN
- क्रमबद्ध इनवॉइस नंबर, 16 कैरेक्टर तक, फाइनेंशियल ईयर में यूनिक
- इनवॉइस की तारीख
- रजिस्टर्ड कस्टमर का नाम, पता और GSTIN
- अनरजिस्टर्ड कस्टमर के लिए, 50,000 रुपये या उससे ज्यादा के बिल पर नाम, पता और प्लेस ऑफ सप्लाई
- हर आइटम का HSN (गुड्स) या SAC (सर्विस) कोड
- डिस्क्रिप्शन, क्वांटिटी और यूनिट
- टैक्सेबल वैल्यू, डिस्काउंट के बाद
- टैक्स रेट और अमाउंट, इंट्रा-स्टेट पर CGST और SGST अलग-अलग, इंटर-स्टेट पर IGST
- इंटर-स्टेट सप्लाई पर प्लेस ऑफ सप्लाई और राज्य का नाम
- रिवर्स चार्ज लागू है या नहीं
- सप्लायर या ऑथराइज़्ड व्यक्ति का सिग्नेचर या डिजिटल सिग्नेचर
पूरी सूची और हर फील्ड का मतलब GST इनवॉइस फॉर्मेट गाइड में है। HSN कितने अंकों का चाहिए, यह टर्नओवर पर निर्भर है: पांच करोड़ रुपये तक कम से कम 4 अंक, उससे ऊपर 6 अंक।
स्टेप बाय स्टेप: मोबाइल ब्राउज़र में पहला GST बिल
पहली बार सेटअप में करीब दस मिनट लगते हैं। उसके बाद हर बिल के लिए सिर्फ स्टेप 6 से 10 दोहराने होते हैं।

- फोन के ब्राउज़र में mybillplease.com/signup खोलें और ईमेल या Google से अकाउंट बनाएं। कार्ड नहीं मांगा जाता।
- बिज़नेस प्रोफाइल भरें: नाम, GSTIN, पता, राज्य। राज्य इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी से तय होता है कि किसी बिल पर CGST/SGST लगेगा या IGST।
- बैंक डिटेल और लोगो जोड़ें। लोगो गैलरी से अपलोड करें; PDF टेम्पलेट में यह अपने आप ऊपर आता है।
- Settings में इनवॉइस नंबरिंग खोलें और प्रीफिक्स तथा शुरुआती नंबर सेट करें। पूरा नंबर 16 कैरेक्टर के अंदर रखें।
- Products या Items में अपने प्रोडक्ट और सर्विस जोड़ें, हर एक के साथ HSN/SAC और GST रेट। यही स्टेप आगे की सारी गलतियां रोकता है।
- Invoices खोलें और New invoice चुनें। तारीख आज की अपने आप आती है; नंबर सीरीज़ से अगला आता है।
- कस्टमर चुनें या नया जोड़ें। B2B कस्टमर का GSTIN डालें; ऐप उससे राज्य पहचान लेता है और प्लेस ऑफ सप्लाई भर देता है। B2C कस्टमर के लिए GSTIN खाली छोड़ें और राज्य चुनें।
- आइटम जोड़ें: प्रोडक्ट चुनें, क्वांटिटी और रेट डालें। HSN और GST रेट प्रोडक्ट मास्टर से आते हैं, टैक्स अपने आप कैलकुलेट होता है और CGST/SGST या IGST में बंटता है।
- डिस्काउंट, शिपिंग चार्ज या नोट हो तो जोड़ें। टैक्सेबल वैल्यू डिस्काउंट के बाद की दिखनी चाहिए।
- Save करें, PDF प्रीव्यू देखें, और Share से WhatsApp या ईमेल पर भेजें।
पूरा फ्लो, लैपटॉप के नजरिए से, GST इनवॉइस कैसे बनाएं में है। मोबाइल पर फर्क सिर्फ स्क्रीन का है, फील्ड वही हैं।
हर बिल भेजने से पहले फोन पर यह देखें
- कस्टमर का GSTIN 15 कैरेक्टर का है और उसका राज्य कोड सही है
- इंटर-स्टेट बिल पर IGST लगा है, इंट्रा-स्टेट पर CGST और SGST
- हर लाइन में HSN या SAC है
- रेट 5, 18 या 40 प्रतिशत में से है, या nil
- इनवॉइस नंबर सीरीज़ से आया है, हाथ से नहीं बदला
- तारीख सप्लाई की तारीख है, पेमेंट की नहीं
टैक्स कैसे लगेगा: CGST/SGST या IGST, और 5/18/40 स्लैब
मोबाइल पर सबसे आम गलती टैक्स के बंटवारे में होती है, और ऐप इसे तभी सही करता है जब आपका राज्य और कस्टमर का राज्य दोनों सही भरे हों।
- सप्लायर और प्लेस ऑफ सप्लाई एक ही राज्य में: CGST और SGST, दोनों आधे-आधे। 18 प्रतिशत के आइटम पर 9 प्रतिशत CGST और 9 प्रतिशत SGST।
- अलग-अलग राज्य: पूरा 18 प्रतिशत IGST।
- गुड्स के लिए प्लेस ऑफ सप्लाई आमतौर पर डिलीवरी का पता है; सर्विस के लिए नियम अलग हो सकते हैं।
तीनों टैक्स का फर्क CGST, SGST और IGST का अंतर में समझाया गया है।
रेट के लिए याद रखें कि 22 सितंबर 2025 से GST 2.0 लागू है और स्लैब 5, 18 और 40 प्रतिशत हैं, साथ में nil रेट। पुराने 12 और 28 प्रतिशत स्लैब खत्म हो चुके हैं। अगर आपके प्रोडक्ट मास्टर में कोई आइटम अब भी 12 या 28 प्रतिशत पर है, तो उसका बिल गलत बनेगा और GSTR-1 में Table 12 की वैलिडेशन फेल होगी। नई GST दरें 2026 में अपडेटेड मैपिंग है।
| सप्लाई का प्रकार | टैक्स का बंटवारा | बिल पर क्या दिखे |
|---|---|---|
| दिल्ली से दिल्ली, 18 प्रतिशत | CGST 9 प्रतिशत + SGST 9 प्रतिशत | दोनों अलग लाइन में |
| दिल्ली से मुंबई, 18 प्रतिशत | IGST 18 प्रतिशत | एक लाइन, प्लेस ऑफ सप्लाई महाराष्ट्र |
| दिल्ली से दिल्ली, 5 प्रतिशत | CGST 2.5 प्रतिशत + SGST 2.5 प्रतिशत | दोनों अलग लाइन में |
| एक्सपोर्ट | जीरो रेटेड, LUT या IGST रिफंड | एक्सपोर्ट इनवॉइस फॉर्मेट |
| Nil रेटेड आइटम | कोई टैक्स नहीं | रेट 0, HSN जरूरी |
इनवॉइस नंबर और सीरीज़: 16 कैरेक्टर का नियम
फोन से बिल बनाने वाले अक्सर नंबर हाथ से टाइप करते हैं, और यहीं से डुप्लीकेट और गैप शुरू होते हैं। Rule 46(b) कहता है कि नंबर क्रमबद्ध हो, 16 कैरेक्टर से ज्यादा न हो, इसमें सिर्फ अक्षर, अंक, हाइफन और स्लैश हों, और एक फाइनेंशियल ईयर में यूनिक हो।
ऐप में एक बार प्रीफिक्स सेट कर दें और नंबर को ऐप पर छोड़ दें। INV/26-27/0001 पंद्रह कैरेक्टर में है, साल दिखाता है, और 1 अप्रैल को नई सीरीज़ INV/27-28/0001 से शुरू हो सकती है। क्रेडिट नोट, डिलीवरी चालान और रसीद वाउचर की अपनी अलग सीरीज़ होती है।
गलत बिल को डिलीट न करें, कैंसल करें। GSTR-1 की Table 13 में हर सीरीज़ का पहला और आखिरी नंबर, कुल और कैंसल की गिनती जाती है; डिलीट किया हुआ बिल गैप छोड़ता है जिसका जवाब देना पड़ सकता है।
बिल को PDF में भेजना और रिकॉर्ड रखना
मोबाइल का असली फायदा यहीं है। बिल सेव होते ही PDF बनता है, और Share बटन से सीधे कस्टमर के WhatsApp पर चला जाता है। कुछ बातें ध्यान रखें:
- PDF टेम्पलेट में लोगो, बैंक डिटेल और GST फील्ड दिखने चाहिए। ज्यादातर ऐप कई टेम्पलेट देते हैं; एक चुनकर सभी बिलों पर वही रखें।
- फाइल का नाम इनवॉइस नंबर पर रखें, ताकि कस्टमर और आप दोनों उसे ढूंढ सकें।
- B2B कस्टमर को PDF के साथ यह भी बता दें कि बिल अगले महीने की 11 तारीख तक GSTR-1 में दिखेगा, जिससे उसे GSTR-2B में मिलेगा और वह IMS में एक्सेप्ट कर सकेगा।
- बिल की कॉपी ऐप में रहती है, लेकिन कस्टमर को भेजे गए PDF को बदलना संभव नहीं, इसलिए भेजने से पहले प्रीव्यू जरूर देखें।
पेमेंट Razorpay लिंक से लेते हैं तो याद रखें कि Razorpay की पेमेंट रसीद टैक्स इनवॉइस नहीं है। इनवॉइस आपको ही जारी करना है; Razorpay रसीद बनाम GST इनवॉइस में यह फर्क समझाया गया है।
मोबाइल पर बिल बनाते समय आम गलतियां
छोटी स्क्रीन पर जो गलतियां बार-बार दिखती हैं, और ऐप का कौन सा सेटअप उन्हें रोकता है।
| गलती | नतीजा | बचाव |
|---|---|---|
| कस्टमर का GSTIN गलत टाइप | कस्टमर को ITC नहीं मिलता, GSTR-1 में गलत B2B एंट्री | कस्टमर मास्टर में एक बार सेव करें, हर बार टाइप न करें |
| HSN खाली छोड़ना | Table 12 में HSN समरी फेल | प्रोडक्ट मास्टर में HSN अनिवार्य रखें |
| इंटर-स्टेट पर CGST/SGST | गलत टैक्स हेड में पेमेंट, सुधार में समय | राज्य से प्लेस ऑफ सप्लाई ऑटो भरने दें |
| पुराना 12 या 28 प्रतिशत रेट | गलत टैक्स, पोर्टल पर रेट वैलिडेशन फेल | प्रोडक्ट मास्टर में रेट अपडेट करें |
| नंबर हाथ से बदलना | डुप्लीकेट या गैप, Table 13 मिसमैच | नंबर ऐप पर छोड़ें, गलत बिल कैंसल करें |
| पेमेंट की तारीख को बिल की तारीख बनाना | गलत रिटर्न पीरियड | तारीख सप्लाई की रखें |
इन गलतियों का पूरा विश्लेषण छोटे बिज़नेस की GST बिलिंग गलतियां में है।
GSTR-1 और GSTR-3B से कनेक्शन
फोन से बना हर बिल रिटर्न का कच्चा माल है। महीने के अंत में B2B बिल GSTR-1 की Table 4 में, B2C बिल Table 5 और 7 में, क्रेडिट नोट Table 9B में, HSN समरी Table 12 में और डॉक्यूमेंट सीरीज़ Table 13 में जाती है। अगर बिल ऐप में बने हैं तो ये टेबल उसी डेटा से तैयार होती हैं, दोबारा टाइप नहीं करनी पड़तीं।

तारीखें याद रखें: मासिक फाइलर के लिए GSTR-1 अगले महीने की 11 तारीख तक, GSTR-3B 20 तारीख तक। पांच करोड़ रुपये तक के टर्नओवर पर QRMP स्कीम में तिमाही रिटर्न और मासिक टैक्स पेमेंट का विकल्प है। देरी पर लेट फीस 50 रुपये प्रति दिन है (nil रिटर्न पर 20 रुपये)। GSTR-1 फाइलिंग गाइड में पूरी प्रक्रिया है।
बिल ही रिटर्न है
जो बिल आप आज फोन से बनाते हैं, वही अगले महीने GSTR-1 में जाता है और कस्टमर के GSTR-2B में दिखता है। बिल बनाते समय दो मिनट की सावधानी रिटर्न के समय दो घंटे की रिकंसिलिएशन बचाती है।
कब मोबाइल काफी नहीं है
कुछ काम फोन से हो तो सकते हैं, लेकिन ध्यान से करने चाहिए।
- e-invoicing: पांच करोड़ रुपये से ज्यादा एग्रीगेट टर्नओवर पर B2B बिलों के लिए IRP से IRN लेना जरूरी है, और दस करोड़ रुपये या उससे ज्यादा टर्नओवर पर बिल की तारीख से 30 दिन के अंदर रिपोर्ट करना होता है। e-invoicing गाइड में प्रक्रिया है।
- e-way bill: गुड्स की मूवमेंट पर तय सीमा से ऊपर e-way bill चाहिए। NIC इंटीग्रेशन वाला ऐप इसे बिल से ही बना देता है, लेकिन वाहन नंबर और दूरी सही भरना आपका काम है।
- बल्क एडिटिंग और रिकंसिलिएशन: महीने के अंत में GSTR-2B मिलान या पचास बिलों में HSN ठीक करना लैपटॉप पर आसान है। क्लाउड ऐप में वही अकाउंट लैपटॉप पर खुलता है।
- एक से ज्यादा यूज़र: फ्री प्लान में एक यूज़र है। स्टाफ को भी बिल बनाने हैं तो पेड प्लान या अलग प्रक्रिया चाहिए।
मोबाइल बिलिंग का एक बार वाला सेटअप
- बिज़नेस प्रोफाइल में GSTIN, पता और राज्य
- बैंक डिटेल और लोगो
- इनवॉइस नंबर प्रीफिक्स और शुरुआती नंबर, 16 कैरेक्टर के अंदर
- हर प्रोडक्ट और सर्विस में HSN/SAC और 5/18/40 वाला रेट
- नियमित कस्टमर, GSTIN के साथ, कस्टमर मास्टर में
- एक PDF टेम्पलेट चुना हुआ
- ब्राउज़र में होम स्क्रीन शॉर्टकट
एक बार यह सेटअप हो जाए तो मोबाइल से बिल बनाना सचमुच दो मिनट का काम है, और रिटर्न के समय कोई डेटा दोबारा नहीं भरना पड़ता। फ्री और पेड ऐप की तुलना के लिए भारत के बेस्ट फ्री बिलिंग सॉफ्टवेयर देखें।
Frequently asked questions
- क्या मोबाइल से बना GST बिल वैध होता है?
- हां। GST कानून यह नहीं देखता कि बिल किस डिवाइस से बना है।
- क्या मोबाइल से GST बिल बनाने के लिए ऐप डाउनलोड करना जरूरी है?
- नहीं। वेब आधारित बिलिंग ऐप मोबाइल ब्राउज़र में ही चलते हैं, और आप उन्हें होम स्क्रीन पर शॉर्टकट की तरह जोड़ सकते हैं।
- मोबाइल से बने बिल में डिजिटल सिग्नेचर कैसे करें?
- Rule 46 में सप्लायर या ऑथराइज़्ड व्यक्ति का सिग्नेचर या डिजिटल सिग्नेचर मांगा गया है।
- अगर कस्टमर का GSTIN नहीं है तो बिल कैसे बनेगा?
- अनरजिस्टर्ड कस्टमर को B2C बिल बनता है, जिसमें GSTIN फील्ड खाली रहता है।
- मोबाइल से बने बिल का इनवॉइस नंबर क्या रखें?
- Rule 46(b) के अनुसार नंबर 16 कैरेक्टर से ज्यादा नहीं हो सकता, इसमें सिर्फ अक्षर, अंक, हाइफन और स्लैश आ सकते हैं, और यह एक फाइनेंशियल ईयर में यूनिक और क्रमबद्ध होना चाहिए।
- क्या फ्री बिलिंग ऐप से GSTR-1 भी बन जाएगा?
- कई फ्री ऐप बिल के डेटा से GSTR-1 और GSTR-3B तैयार करते हैं, क्योंकि रिटर्न की B2B, B2C, HSN समरी (Table 12) और डॉक्यूमेंट सीरीज (Table 13) उन्हीं बिलों से बनती हैं।
- मोबाइल से बिल बनाने की क्या सीमाएं हैं?
- पांच करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर पर B2B बिलों के लिए e-invoicing और IRN जरूरी है, और गुड्स की मूवमेंट पर e-way bill भी।




